सिंधी समाज का सबसे बड़ा पर्व चालिया महोत्सव 2023 वसई में 24 को
सिंधी समाज का सबसे बड़ा पर्व चालिया महोत्सव 2023 आज 16 जुलाई से शुरू हो हुआ था . यह सिंधी समाज का 40 दिवसीय अखंड ज्योति महोत्सव है. यह महोत्सव 40 दिनों तक चलता है. सोलह जुलाई से शुरू होने वाला यह सिंधी महोत्सव 24 अगस्त 2023 को समाप्त होगा. सिंधी समुदाय के लोग इस शुभ अवसर पर 40 दिनों तक व्रत रखते हैं और अपने सबसे बड़े देव झूलेलाल की सुबह –शाम पूजा करते हैं तथा उनकी कथा का श्रावण करते हैं. इस दौरान झूलेलाल के मंदिरों को बड़े ही सुंदर ढंग से सजाया जाता है. भक्त मंदिरों में
...सिंधी समाज का सबसे बड़ा पर्व चालिया महोत्सव 2023 आज 16 जुलाई से शुरू हो हुआ था . यह सिंधी समाज का 40 दिवसीय अखंड ज्योति महोत्सव है. यह महोत्सव 40 दिनों तक चलता है. सोलह जुलाई से शुरू होने वाला यह सिंधी महोत्सव 24 अगस्त 2023 को समाप्त होगा. सिंधी समुदाय के लोग इस शुभ अवसर पर 40 दिनों तक व्रत रखते हैं और अपने सबसे बड़े देव झूलेलाल की सुबह –शाम पूजा करते हैं तथा उनकी कथा का श्रावण करते हैं. इस दौरान झूलेलाल के मंदिरों को बड़े ही सुंदर ढंग से सजाया जाता है. भक्त मंदिरों में सुबह- शाम पूजा अर्चना करते हैं तथा आरती करके प्रसाद का वितरण किया जाता है.

चालिया महोत्सव के दौरान महिलाएं व्रत रखती हुई भगवान झूलेलाल के मंदिर में जाकर उनकी पूजा करती है. उनकी पूजा के लिए महिलाएं घर से चार या पंच मुखी आटे का दीपक लेकर आती है और उसे पूजा के दौरान उनके समक्ष इसे चढ़ाती है. इसके अलावा भगवान झुलेलाल के चरणों में चावल, इलायची, मिश्री और लौंग अर्पित करती है. मान्यता है कि इससे महिलाओं की मनोकामना पूरी होती है. सिंधी समाज के अनुसार चालिया महोत्सव जीवन को सुखी बनाने और लोक कल्याण के लिए मनाया जाता है.
भगवान झूलेलाल के इस पर्व में जल की आराधना करने की परंपरा है. सिंधी समाज की मान्यता है कि इन दिनों भगवान झूलेलाल वरुणदेव का अवतरण करके अपने भक्तों के सारे दुःख दर्द दूर किये थे. मान्यता है कि जो लोग 40 दिन इनकी विधि –विधान से पूजा करते हैं. भगवान झूलेलाल उनकी सारी मनोकामना पूरी करते हैं. भगवान झूलेलाल की कृपा से भक्तों के घर में सुख –शांति और समृद्धि बनी रहती है.
वसई में इस उत्सव का 24 तारीख के कार्यक्रम के बारे में पूज्य गुरयानी श्रीमती लता शर्मा ने बताया कि शाम को 5 बजे एवरशायन के मंदिर में चालिह साहब के कार्यक्रम का आयोजन रखा गया है . वहीँ से सभी परिवार जलदेवता की पूजा के लिए समुन्दर पर जायेंगे . इसके पहले इसी मंदिर में 17-08 -20 23 को चन्द्र दर्शन का कार्यक्रम मनाया गया था .
About The Author
Lorem Ipsum is simply dummy text of the printing and typesetting industry. Lorem Ipsum has been the industry's standard dummy text ever since the 1500s, when an unknown printer took a galley of type and scrambled it to make a type specimen book. It has survived not only five centuries, but also the leap into electronic typesetting, remaining essentially unchanged. It was popularised in the 1960s with the release of Letraset sheets containing Lorem Ipsum passages, and more recently with desktop publishing software like Aldus PageMaker including versions of Lorem Ipsum.


Comment List